श्री मान जी क्या आप सहमत हैं ?
1:-देश कि जनता अगर संविधान के अनुरूप कोई मांग रखती है तो आपको क्यों लगता है कि हम लोग संसदीय व्यवस्था को समाप्त करना चाहते हैं ?
2:-क्या आप सहमत हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर जनहित का कोई नियम-कानून बनाते समय सभी जातीय और धार्मिक वर्गों से (जिनकी जनसँख्या 50 लाख से कम न हो) सहमती ली जाये ?
3:-क्या आप सहमत हैं कि जो प्रतियाशी चुनाव में खड़ा किया जाता है,उस पर भ्रष्टाचार के आरोप हों तो उसकी राजनितिक दल से सदस्यता समाप्त कर,चुनाव लड़ने पर रोक लगे ?
4:-क्या आप सहमत हैं कि किसी जनप्रतिनिधि के विधानसभा/लोकसभा क्षेत्र में निर्माण और विकास कार्यों में दोष हो/ क्षेत्र में विकास कार्य ठीक से न हो और जन धन का गबन करे तो उसके,चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाये ?
5:-सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार विकास या जन सहायता को दिए धन में से 30% प्रयोग में लाया जाता है,70% भ्रष्टाचारी खा जाते हैं,क्या आप सहमत हैं कि इसके विरुद्ध सख्त जनलोकपाल बनाकर कठोर कार्यवाही की जाये ?
6:-क्लर्क स्तर के कर्मचारियों के पास छापों में पचासों करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली है,ऐसे भ्रष्टाचार की निगरानी हेतु निगरानी तंत्र नहीं है,क्या आप सहमत हैं,ऐसे लोगों की निगरानी हेतु जनलोकपाल कानून बनाकर कठोर कार्यवाही हो ?
7:- कर व्यवस्था बहुत भयावह है,जो 20% आय+10%सेवा+10%सीमा शुल्क+12.5%मूल्य वर्धित+10% अन्य कर(परिवहन+जल+गृह+बिक्रीकर) सहित लगभग 62.5%बैठता है जिससे जनता दिनो-दिन गरीब होती जा रही है क्योंकि 20%आयकर के अतिरिक्त शेष 42.5% कर किसी न किसी रूप में मजदूर,किसान,रिक्शा-ट्राली चालक आदि से बसूला जाता हैं,धन की अत्यधिक उपलब्धता के कारण भ्रष्टाचारियों को भ्रष्ठाचार करने का अवसर प्राप्त होता है,क्या आप सहमत है कि कर व्यवस्था को पुनः संशोधित किया जाये और कर 62.5% से घटाकर 35% किया जाये ?
8:- राशनकार्ड,गैस कनेक्शन,विद्युत् कनेक्शन,निवास प्रमाण-पत्र,आदि को बनाने में बहुत रिश्वतखोरी है,क्या आप सहमत है कि मतदाता पहचान-पत्र की तरह इन दस्तावेजों को भी घरों तक पहुँचाना आवश्यक है ?
9:- क्या आप सहमत हैं कि राजनितिक दलों को झूठे वादों से बचानें हेतु यह आवश्यक है कि चुनावी घोषणा-पत्रों को अभिलेखीय रूप में रखा जाये,जिससे समय आने पर उनका उत्तर दायित्व तय कर उनसे जवाब मांगा जाये ?
जनता करे सवाल ?
1:-देश कि जनता अगर संविधान के अनुरूप कोई मांग रखती है तो आपको क्यों लगता है कि हम लोग संसदीय व्यवस्था को समाप्त करना चाहते हैं ?
2:-क्या आप सहमत हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर जनहित का कोई नियम-कानून बनाते समय सभी जातीय और धार्मिक वर्गों से (जिनकी जनसँख्या 50 लाख से कम न हो) सहमती ली जाये ?
3:-क्या आप सहमत हैं कि जो प्रतियाशी चुनाव में खड़ा किया जाता है,उस पर भ्रष्टाचार के आरोप हों तो उसकी राजनितिक दल से सदस्यता समाप्त कर,चुनाव लड़ने पर रोक लगे ?
4:-क्या आप सहमत हैं कि किसी जनप्रतिनिधि के विधानसभा/लोकसभा क्षेत्र में निर्माण और विकास कार्यों में दोष हो/ क्षेत्र में विकास कार्य ठीक से न हो और जन धन का गबन करे तो उसके,चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाये ?
5:-सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार विकास या जन सहायता को दिए धन में से 30% प्रयोग में लाया जाता है,70% भ्रष्टाचारी खा जाते हैं,क्या आप सहमत हैं कि इसके विरुद्ध सख्त जनलोकपाल बनाकर कठोर कार्यवाही की जाये ?
6:-क्लर्क स्तर के कर्मचारियों के पास छापों में पचासों करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली है,ऐसे भ्रष्टाचार की निगरानी हेतु निगरानी तंत्र नहीं है,क्या आप सहमत हैं,ऐसे लोगों की निगरानी हेतु जनलोकपाल कानून बनाकर कठोर कार्यवाही हो ?
7:- कर व्यवस्था बहुत भयावह है,जो 20% आय+10%सेवा+10%सीमा शुल्क+12.5%मूल्य वर्धित+10% अन्य कर(परिवहन+जल+गृह+बिक्रीकर) सहित लगभग 62.5%बैठता है जिससे जनता दिनो-दिन गरीब होती जा रही है क्योंकि 20%आयकर के अतिरिक्त शेष 42.5% कर किसी न किसी रूप में मजदूर,किसान,रिक्शा-ट्राली चालक आदि से बसूला जाता हैं,धन की अत्यधिक उपलब्धता के कारण भ्रष्टाचारियों को भ्रष्ठाचार करने का अवसर प्राप्त होता है,क्या आप सहमत है कि कर व्यवस्था को पुनः संशोधित किया जाये और कर 62.5% से घटाकर 35% किया जाये ?
8:- राशनकार्ड,गैस कनेक्शन,विद्युत् कनेक्शन,निवास प्रमाण-पत्र,आदि को बनाने में बहुत रिश्वतखोरी है,क्या आप सहमत है कि मतदाता पहचान-पत्र की तरह इन दस्तावेजों को भी घरों तक पहुँचाना आवश्यक है ?
9:- क्या आप सहमत हैं कि राजनितिक दलों को झूठे वादों से बचानें हेतु यह आवश्यक है कि चुनावी घोषणा-पत्रों को अभिलेखीय रूप में रखा जाये,जिससे समय आने पर उनका उत्तर दायित्व तय कर उनसे जवाब मांगा जाये ?
जनता करे सवाल ?

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