कांग्रेस के आत्म विश्वास की वजह क्या है ?
केंद्र में कांग्रेस सरकार के आठ वर्ष पूरे हो चुके हैं , वर्तमान तीन वर्ष और पूर्व के पांच वर्ष के कार्य काल में जो कुछ भी हुआ वो देश और देश वासियों के लिए अत्यंत घातक है , सारी दुनिया में भारत की छवि रसातल में पहुँच गयी है , इस सरकार के कार्य काल से पूर्व कुछ गैर कांग्रेसी सरकारों ने जो भी अच्छी नीतियाँ बनाकर देश को प्रगति के पथ पर आगे बढाया था उसको वर्त्तमान सरकार के चुनिंदा मंत्री और लोक सभा व राज्य सभा सदस्य मिलकर बर्बाद कर चुके हैं , देश पुनः उसी स्थिति में जा चुका है जहाँ कांग्रेस के 25 वर्ष पहले के कार्य काल में था , कई मोर्चों पर सरकार की विफलता देखकर यही लगता है कि जैसे वर्तमान सरकार देश के साथ कोई षड़यंत्र कर रही हो .
इस तीन वर्ष के कार्य काल के पूर्व भी पांच वर्ष कांग्रेस सरकार ने केंद्र में शासन किया है , और हमें ठीक से याद है और अगर हम भूल गए हों तो ठीक से याद करने की आवश्यकता है की पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में भी कांग्रेस नीत सरकार ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया था जिसके लिए उसको पुनः सत्ता में आना चाहिए था .
और जिस प्रकार कांग्रेस सत्ता में आ गयी अगर फिर से उसी प्रकार चुनाव प्रक्रिया का दुरूपयोग हुआ तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस बार पुनः सत्ता में आ जाए .
सभी को याद होगा कि 2009 का आम चुनाव संपन्न होने पर चरों और से चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन में हेर-फेर के आरोप कांग्रेस पर लगे थे , लेकिन कानूनी रूपसे इसको किसी भी प्रकार चुनौती देने के सीमित प्रावधानों के कारन जयादा कुछ किया नही जा सका .
मै स्वयं मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा था जहाँ कांग्रेस ने मोहम्मद अज़हरुद्दीन को हैदराबाद से आयात करके भारतीय जनता पार्टी के सर्वेश सिंह के विरुद्ध चुनाव में उतारा था .
मै आपको बताना चाहता हूँ कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी -*ने उपरोक्त लोक सभा क्षेत्र में 50.50% वोटिंग होने की अधिकारिक घोषणा की थी , लेकिन जिस दिन काउंटिंग हुयी तो इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों में 57.50% वोट निकले हम यह नहीं जान पाए कि आखिर गड़बड़ी कंहाँ हुयी मगर हमको ये मालूम था कि मुरादाबाद विकास प्राधिकरण कालोनी में बी.जे.पी. उम्मीदवार सर्वेश सिंह जी की बहिन और उनके परिवार के अन्य लोग रहते थे , और इन लोगों ने एफिडेविट पर सशपथ बताया था की सम्बंधित बूथ से 90 लोगों ने सर्वेश सिंह जी के पक्ष में मतदान किया था , जबकि परिणाम आने पर वोटों की गिनती के बाद उस बोथ पर केवल तीन ( 03 ) हो वोट उनके पक्ष में निकले थे , यह केवल एक बूथ की बात है जो मै आपको बता रहा हूँ लेकिन इसके अतिरिक्त भी अन्य बूथों पर कमोबेश यही स्थिति थी , अर्थात जहाँ उनके सर्वेश सिंह जी के पक्ष में 50 वोट पड़े थे वहां केवल पांच या छः वोट ही गिनती के समय मिले थे.
कुछ सूचनाएं जन-सुचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गयी जो जान-बूझकर तीन माह बाद दी गयी और चुनाव सम्बंधित किसी भी गड़बड़ी को नयायालय में केवल 60 दिन के ही अन्दर चुनौती दी जा सकती है.
अतः इस सम्बन्ध में चाहकर भी कुछ नहीं किया जा सका था, आपको बताना आवश्यक है की उत्तर प्रदेश से जितने भी लोक सभा सदस्य जीते हैं उनमे से वास्तव में एक भी ऐसा नही है जो निष्पक्ष रूपसे चुनाव लड़ने पर विधायक या एम०पी० तो क्या पार्षद का भी चुनाव जीत सके , यही स्थिति सारे देश में थी जिसके दम पर कांग्रेस ने निवर्तमान चुनाव जीता था.
वर्तमान सरकार भी इसी दंभ के बशीभूत होकर एक से बढ़कर अनाप-शनाप जन विरोधी निर्णय ले रही है क्योंकि शायद उसे लगता है कि वो पिछली बार की तरह ही इस बार भी चुनाव में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी करके चुनाव जीत सकती है.
अतः इस सम्बन्ध में अब यह ध्यान देने वाली बात है की हम लोग ऐसी संभावित स्थिति से देश को बचाने के लिए क्या कुछ करें ?
और उत्तर है कि हमको इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों की जगह केवल बैलेट पेपर द्वारा वोट डालने के लिए आन्दोलन चलाना चाहिए.
केंद्र में कांग्रेस सरकार के आठ वर्ष पूरे हो चुके हैं , वर्तमान तीन वर्ष और पूर्व के पांच वर्ष के कार्य काल में जो कुछ भी हुआ वो देश और देश वासियों के लिए अत्यंत घातक है , सारी दुनिया में भारत की छवि रसातल में पहुँच गयी है , इस सरकार के कार्य काल से पूर्व कुछ गैर कांग्रेसी सरकारों ने जो भी अच्छी नीतियाँ बनाकर देश को प्रगति के पथ पर आगे बढाया था उसको वर्त्तमान सरकार के चुनिंदा मंत्री और लोक सभा व राज्य सभा सदस्य मिलकर बर्बाद कर चुके हैं , देश पुनः उसी स्थिति में जा चुका है जहाँ कांग्रेस के 25 वर्ष पहले के कार्य काल में था , कई मोर्चों पर सरकार की विफलता देखकर यही लगता है कि जैसे वर्तमान सरकार देश के साथ कोई षड़यंत्र कर रही हो .
इस तीन वर्ष के कार्य काल के पूर्व भी पांच वर्ष कांग्रेस सरकार ने केंद्र में शासन किया है , और हमें ठीक से याद है और अगर हम भूल गए हों तो ठीक से याद करने की आवश्यकता है की पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल में भी कांग्रेस नीत सरकार ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया था जिसके लिए उसको पुनः सत्ता में आना चाहिए था .
और जिस प्रकार कांग्रेस सत्ता में आ गयी अगर फिर से उसी प्रकार चुनाव प्रक्रिया का दुरूपयोग हुआ तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस बार पुनः सत्ता में आ जाए .
सभी को याद होगा कि 2009 का आम चुनाव संपन्न होने पर चरों और से चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन में हेर-फेर के आरोप कांग्रेस पर लगे थे , लेकिन कानूनी रूपसे इसको किसी भी प्रकार चुनौती देने के सीमित प्रावधानों के कारन जयादा कुछ किया नही जा सका .
मै स्वयं मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा था जहाँ कांग्रेस ने मोहम्मद अज़हरुद्दीन को हैदराबाद से आयात करके भारतीय जनता पार्टी के सर्वेश सिंह के विरुद्ध चुनाव में उतारा था .
मै आपको बताना चाहता हूँ कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी -*ने उपरोक्त लोक सभा क्षेत्र में 50.50% वोटिंग होने की अधिकारिक घोषणा की थी , लेकिन जिस दिन काउंटिंग हुयी तो इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों में 57.50% वोट निकले हम यह नहीं जान पाए कि आखिर गड़बड़ी कंहाँ हुयी मगर हमको ये मालूम था कि मुरादाबाद विकास प्राधिकरण कालोनी में बी.जे.पी. उम्मीदवार सर्वेश सिंह जी की बहिन और उनके परिवार के अन्य लोग रहते थे , और इन लोगों ने एफिडेविट पर सशपथ बताया था की सम्बंधित बूथ से 90 लोगों ने सर्वेश सिंह जी के पक्ष में मतदान किया था , जबकि परिणाम आने पर वोटों की गिनती के बाद उस बोथ पर केवल तीन ( 03 ) हो वोट उनके पक्ष में निकले थे , यह केवल एक बूथ की बात है जो मै आपको बता रहा हूँ लेकिन इसके अतिरिक्त भी अन्य बूथों पर कमोबेश यही स्थिति थी , अर्थात जहाँ उनके सर्वेश सिंह जी के पक्ष में 50 वोट पड़े थे वहां केवल पांच या छः वोट ही गिनती के समय मिले थे.
कुछ सूचनाएं जन-सुचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गयी जो जान-बूझकर तीन माह बाद दी गयी और चुनाव सम्बंधित किसी भी गड़बड़ी को नयायालय में केवल 60 दिन के ही अन्दर चुनौती दी जा सकती है.
अतः इस सम्बन्ध में चाहकर भी कुछ नहीं किया जा सका था, आपको बताना आवश्यक है की उत्तर प्रदेश से जितने भी लोक सभा सदस्य जीते हैं उनमे से वास्तव में एक भी ऐसा नही है जो निष्पक्ष रूपसे चुनाव लड़ने पर विधायक या एम०पी० तो क्या पार्षद का भी चुनाव जीत सके , यही स्थिति सारे देश में थी जिसके दम पर कांग्रेस ने निवर्तमान चुनाव जीता था.
वर्तमान सरकार भी इसी दंभ के बशीभूत होकर एक से बढ़कर अनाप-शनाप जन विरोधी निर्णय ले रही है क्योंकि शायद उसे लगता है कि वो पिछली बार की तरह ही इस बार भी चुनाव में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी करके चुनाव जीत सकती है.
अतः इस सम्बन्ध में अब यह ध्यान देने वाली बात है की हम लोग ऐसी संभावित स्थिति से देश को बचाने के लिए क्या कुछ करें ?
और उत्तर है कि हमको इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों की जगह केवल बैलेट पेपर द्वारा वोट डालने के लिए आन्दोलन चलाना चाहिए.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें